सहीफ़ा कामेलह - ईमाम ज़ैन अल'आबेदीन (अ:स) की दुआओँ का सहीफ़ा﴿

दुआ 33 - दुआए इस्तेख़ारा 

Real Listen Online/Download    Video    Mp 3  |  हिन्दी मानी पढ़ें   |   अरबी को हिंदी में पढ़ें 

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है 

बिस्मिल्लाह अर'रहमान अर'रहीम 

بِسْمِ اللهِ الرَحْمنِ الرَحیمْ

बारे इलाहा! मैं तेरे इल्म के ज़रिये तुझसे ख़ैर व बहबूद चाहता हूँ। तू मोहम्मद (स0) और उनकी आल (अ0) पर रहमत नाज़िल फ़रमा और मेरे लिये अच्छाई का फ़ैसला सादर फ़रमा, और हमारे दिल में अपने फ़ैसले (की हिकमत व मसलेहत) का अलक़ा कर और उसे एक ज़रिया क़रार दे के हम तेरे फ़ैसले पर राज़ी रहें और तेरे हुक्म के आगे सरे तस्लीम ख़म करें, इस तरह हमसे शक की ख़लिश दूर कर दे और मुख़लेसीन का यक़ीन हमारे अन्दर पैदा करके हमें तक़वीयत दे और हमें ख़ुद हमारे हवाले न कर दे के जो तूने फ़ैसला किया है उसकी मग़फ़ेरत से आजिज़ रहें और तेरी क़ुदरत व मन्ज़िलत को सुबुक समझें और जिस चीज़ से तेरी रज़ा वाबस्ता है उसे नापसन्द करें और जो चीज़ अन्जाम की ख़ूबी से दूर और आफ़ियत की ज़द से क़रीब हो उसकी तरफ़ माएल हो जाएं। तेरे जिस फ़ैसले को हम नापसन्द करें वह हमारी नज़रों में पसन्दीदा बना दे और जिसे हम दुश्वार समझें उसे हमारे लिये सहल व आसान कर दे और जिस मशीयत व इरादे को हमसे मुताल्लुक़ किया है उसकी इताअत हमारे दिल में अलक़ा कर। यहां तक के जिस चीज़ में तूने ताजील की है उसमें ताख़ीर और जिसमें ताख़ीर की है उसमें ताजील न चाहें और जिसे तूने पसन्द किया है उसे नापसन्द और जिसे नागवार समझा है उसे इख़्तेयार न करें। और हमारे कामों का उस चीज़ पर ख़ातेमा कर जो अन्जाम के लेहाज़ से पसन्दीदा और मआल के एतबार से बेहतर हो। इसलिये के तू नफ़ीस व पाकीज़ा चीज़ें अता करता और बड़ी नेमतें बख़्शता है और जो चाहता है वही करता है और तू हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है।

 

أَللَّهُمَّ إنِّي أَسْتَخِيرُكَ بِعِلْمِكَ فَصَلِّ عَلَى مُحَمَّد وَآلِهِ وَاقْضِ لِيْ بِالْخِيَرَةِ وَأَلْهِمْنَا مَعْرِفَةَ الاخْتِيَارِ، وَاجْعَلْ ذَلِكَ ذَرِيعَةً إلَى الرِّضَا بِمَا قَضَيْتَ لَنَا وَالتَّسْلِيْمِ لِمَا حَكَمْتَ. فَأَزِحْ عَنَّا رَيْبَ الارْتِيَابِ، وَأَيِّدْنَا بِيَقِينِ الْمُخْلِصِينَ، وَلاَ تَسُمْنَا عَجْزَ الْمَعْرِفَةِ عَمَّا تَخَيَّرْتَ، فَنَغْمِطَ قَدْرَكَ، وَنَكْرَهَ مَوْضِعَ رِضَاكَ،  وَنَجْنَحَ إلَى الَّتِي هِيَ أَبْعَدُ مِنْ حُسْنِ الْعَاقِبَةِ وَأَقْرَبُ إلَى ضِدِّ الْعَافِيَةِ. حَبِّبْ إلَيْنَا مَا نَكْرَهُ مِنْ قَضَائِكَ وَسَهِّلْ عَلَيْنَا مَا نَسْتَصْعِبُ مِنْ حُكْمِكَ، وَأَلْهِمْنَـا الانْقِيَـادَ لِمَا أَوْرَدْتَ عَلَيْنَـا مِنْ مَشِيَّتِكَ حَتَّى لاَ نُحِبَّ تَأخِيْرَ مَا عَجَّلْتَ، وَلاَ تَعْجيْلَ مَا أَخَّرْتَ، وَلا نَكْرَهَ مَا أَحْبَبْتَ، وَلا نَتَخَيَّرَ مَا كَرِهْتَ، وَاخْتِمْ لَنَا بِالَّتِي هِيَ أَحْمَدُ عَاقِبةً وَأكْرَمُ مَصِيراً إنَّكَ تُفِيدُ الْكَرِيمَةَ وَتُعْطِي الْجَسِيمَةَ، وَتَفْعَلُ مَا تُرِيدُ وَأَنْتَ عَلَى كُلِّ شَيْء قَدِيرٌ .

 

दुसरे अहम् लिंक्स देखें

मुहर्रम 

सफ़र 

रबी'उल अव्वल  रजब 

शाबान 

रमज़ान  ज़िल्काद  ज़िल्हज्ज 
क़ुरान करीम  क़ुरानी दुआएँ  दुआएँ  ज्यारतें 
अहलेबैत (अ:स) कौन हैं? सहीफ़ा-ए-मासूमीन (अ:स) नमाज़ मासूमीन (अ:स) और दूसरी अहम् नमाज़ें  हज़रत ईमाम मेहदी (अ:त:फ़)
ईस्लामी क़ानून और फ़िक्ह  लाईब्रेरी  उल्मा-ए-दीन  इस्लामी महीने और ख़ास तारीख़ें

कृपया अपना सुझाव  भेजें

ये साईट कॉपी राईट नहीं है !