सहीफ़ा कामेलह - ईमाम ज़ैन अल'आबेदीन (अ:स) की दुआओँ का सहीफ़ा﴿

दुआ 29 - रिज़क़ के तंगी में पढ़ी जाने वाली दुआ

Real-Listen OnlineDownload   Video   MP3  |  हिन्दी मानी पढ़ें   |   अरबी को हिंदी में पढ़ें 

शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है 

बिस्मिल्लाह अर'रहमान अर'रहीम 

بِسْمِ اللهِ الرَحْمنِ الرَحیمْ

ऐ अल्लाह! तूने रिज़्क़ के बारे में बेयक़ीनी से और ज़िन्दगी के बारे में तूले अमल से हमारी आज़माइश की है। यहाँ तक के हम उनसे रिज़्क़ तलब करने लगे जो तुझसे रिज़्क़ पाने वाले हैं और उम्र रसीदा लोगों की उम्रे देखकर हम भी दराज़िए उम्र की आरज़ूएं करने लगे। ऐ अल्लाह! मोहम्मद (स0) और उनकी आल (अ0) पर रहमत नाज़िल फ़रमा और हमें ऐसा पुख़्ता यक़ीन अता कर जिसके ज़रिये तो हमें तलब व जुस्तजू की ज़हमत से बचा ले और ख़ालिस इत्मीनानी कैफ़ियत हमारे दिलों में पैदा कर दे जो हमें रंज व सख़्ती से छुड़ा ले और वही के ज़रिये जो वाज़ेह और साफ़ वादा तूने फ़रमाया है और अपनी किताब में उसके साथ साथ क़सम भी खाई है। उसे इस रोज़ी के एहतेमाम से जिसका तू ज़ामिन है। सुबुकदोशी का सबब क़रार दे और जिस रोज़ी का ज़िम्मा तूने लिया है उसकी मशग़ूलियतों से अलाहेदगी का वसीला बना दे। चुनांचे तूने फ़रमाया है और तेरा क़ौल हक़ और बहुत सच्चा है और तूने क़सम खाई है और तेरी क़सम सच्ची और पूरी होने वाली है के तुम्हारी रोज़ी और वह जिसका तुमसे वादा किया जाता है आसमान में है फिर तेरा इरशाद हैः- "ज़मीन व आसमान के मालिक की क़सम यह अम्र यक़ीनी व क़तई है जैसे यह के तुम बोल रहे हो।

 

أَللَّهُمَّ إنَّكَ ابْتَلَيْتَنَا فِي أَرْزَاقِنَا بِسُوءِ الظَّنِّ وَفِي آجَالِنَا بِطُولِ الأمَلِ حَتَّى الْتَمَسْنَا أَرْزَاقَكَ مِنْ عِنْدِ الْمَرْزُوقِينَ، وَطَمِعْنَا بِآمَالِنَا فِي أَعْمَارِ الْمُعَمَّرِينَ.  فَصَلِّ عَلَى مُحَمَّد وَآلِهِ، وَهَبْ لَنَا يَقِيناً صَادِقاً تَكْفِينا بِهِ مِنْ مَؤونَةِ الطَّلَبِ، وَأَلْهِمْنَا ثِقَةً خَالِصَةً تُعْفِينَا بِهَا مِنْ شِدَّةِ النَّصَبِ، وَاجْعَلْ مَا صَرَّحتَ بِهِ مِنْ عِدَتِكَ فِي وَحْيِكَ، وَأَتْبَعْتَهُ مِنْ قَسَمِكَ فِي كِتَابِكَ قَاطِعاً لاهْتِمَامِنَا بِالرِّزْقِ الَّـذِيْ تَكَفَّلْتَ بِهِ وَحَسْمَاً لِلاشْتِغَالِ بِمَا ضَمِنْتَ الْكِفَايَةَ لَهُ، فَقُلْتَ وَقَوْلُكَ الْحَقُّ الاصْـدَقُ وَأَقْسَمْتَ وَقَسَمُكَ الأَبَرُّ الأَوْفى: ( وَفِي السَّمَاءِ رِزْقُكُمْ وَمَا تُوعَدُونَ ) ثُمَّ قُلْتَ: ( فَوَرَبِّ السَّمَاءِ وَالأَرْضِ إنَّهُ لَحَقٌّ مِثْلَ مَا أَنَّكُمْ تَنْطِقُوْنَ ).

 

दुसरे अहम् लिंक्स देखें

मुहर्रम 

सफ़र 

रबी'उल अव्वल  रजब 

शाबान 

रमज़ान  ज़िल्काद  ज़िल्हज्ज 
क़ुरान करीम  क़ुरानी दुआएँ  दुआएँ  ज्यारतें 
अहलेबैत (अ:स) कौन हैं? सहीफ़ा-ए-मासूमीन (अ:स) नमाज़ मासूमीन (अ:स) और दूसरी अहम् नमाज़ें  हज़रत ईमाम मेहदी (अ:त:फ़)
ईस्लामी क़ानून और फ़िक्ह  लाईब्रेरी  उल्मा-ए-दीन  इस्लामी महीने और ख़ास तारीख़ें

कृपया अपना सुझाव  भेजें

ये साईट कॉपी राईट नहीं है !