20 सफ़र चेहलुम / अर'बईन (आशूर के बाद 40वाँ दिन)  

अर'बईन क्यों मानते हैं?

 

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20 सफ़र "अर'बईन का दिन / रोज़े  अर'बईन" कहलाता है, जो इमाम हुसैन की शहादत के 40वेँ दिन इमाम (अ:स) और उनके रिश्तेदारों और दोस्तों की शहादत का दिन के रूप में मनाया जाता है, जो कर्बला में 10 मुहर्रम को शहीद कर दिए गए थे!

इमाम हसन बिन अली अल-अस्करी (अ:स) के अनुसार, आज के रोज़ यह बेहतर है की :-

1. 51 रक्-अत नमाज़,अर'बईन के ईन 24 घंटों में पढ़ें (जिसमें 17 रक्-अत तो रोजाना की वाजिब नमाज़ों की है और बाक़ी की 34 रक्-अत नाफिला पढ़ें)

2. कोशिश यह करें की आप इमाम (अ:स) और दुसरे शहीदों की ज़्यारत के लिए कर्बला में रहें, परन्तु अगर यह संभव नहीं हो तो, इमाम हुसैन (अ:स) और दुसरे कर्बला के शहीदों की ज़्यारत पढ़ें!

3. अपने दाहिने हाथ में अंगूठी पहनें

4. अपना सजदा ज़मीन/ख़ाक पर करें (कर्बला को हमेशा तरजीह दें)

5. जब नमाज़ पढ़ें तो "बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम" साफ़ साफ़ और ज़ोर से कहें!

6. इमाम जाफर बिन मुहम्मद अल-सादिक़ (अ:स) ने अपने वफादारों को इस दिन "ज़्यारते अर'बईन"  पढ़ने की सलाह दी है !

 

बिस्मिल्ला हिर रहमा नीर रहीम

 

अस्सलामु अला वली-इल्लाही वा हबी-बेही

अस्सलामु अला ख़ली-लिल्लाही वा नजीबेही

अस्सलामु अला सफी-इल्लाही वाब्नी सफी-येही

अस्सलामु अला' हुसैनी मज्लूमिश शहीद

अस्सलामु अला असीरिल क़ुरुबाती क़तीली' अबारात

अलाहुम्मा इन्नी अश-हदू अन्नाहू वालिय्युका वाब्नु वालिय्यिका

सफिय्युका वाब्नु सफिय्यिकल फा-इजु बे-करामतिका अक्रम्ताहू बिष शहादती

-'अबव्ताहू बीस-सा-अ'आदती वज-ताबय्ताहू बी-त'ईबी ले वी'लादती

जा-अ'ल्ताहू सय्यिदन मिनस सादाती क़ा-इदन मिनल क़ा-दते

वा ज़ा-इदन मिनल ज़ा-दते '-तय्ताहू मौआरीसल अम्बिया-ई

जा-अ'ल्ताहू हुज'जतन 'ला खल्किका मिनल औउसिया-ए फ़ा अज़ारा फ़ीद-दुआए

मन 'अन नुस'हा बज़'अला मुह्जताहू फ़ीका ल-यस्तंकीज़ा' 'बादिका मिनल जहालाती

हैरातिज़ ज़लालती क़द तावाज़रा अलैही मन गर्रताहू दुन्या

बा-अ''अज़'अहू बिल-अर्ज़'अलील अदना

शरा आखिराताहू बीस-सामनिला'उकासिवा तग''रसा वातारद'दा फ़ी हवाहू

अस्खत'अका अस्खत' नाबिय्याका

अत' मिन 'बादिका अहलश शिक़ाकी वन निफाक़ी

'अमलातल औज़ारिल मुस्तौजिबीनन नार फ़-जाहादा हुम फ़ीका 'आबिरण मुह्तासिबन

हत्ता सु 'फीका फ़ी 'आ-तिका दमुहू वास्तुबीह' 'अरीमुहू

अल्लाहुम्मा फल-अ'न्हुम ला'-नन बी'लन 'जाइ-ब हुमा''आबन अलीमा

अस्सलामो अलैका यबना रसूलिल्लाहे

अस्सलामो अलैका यबना सय्येद-दिल औसिया-ए

अशहदों-अन्नका अमीनुल-लाहे वब्ना अमीनेही

अ-एशुता साइदा वा मा-ज़'ऐता हमीदा

वा मुत्ता फ़ा-क़ीदा मजलूम शहीदा

अश-हदू अन्नाल्लाहा मुन्जिज़ुन मा

व-अ'दका मुह-ली कुन मन खज़'अलाका

मु-अज़'ज़िबू मन क़तालाका

अश-हदू अन्नका वाफ़यता बी-अह'दिल्लाही

जाहाद्ता फ़ी सबीलिही हत्ता अतिकाल यक़ीन

फ़-ला-अ'नाल्लाहू मन क़तालाका

ला-अ'नाल्लाहू मन ज़'अलामाका

ला-अ'नल'लाहू उम्मातन सामी-अत बी-जालिका 'राज़ियत बिही

अल्लाहुम्मा इन्नी उष-हिदोका अन्नी वालिय्युन लीमन वालाहू

वा'दुव्वुन लीमन 'दाहू बी-अबी अन्ता

उम्मी यबना रसूलिल'लाही

अश-हदू अन्नका कुंता नूरान फिल अस'लाबिश शामिखती

वल अर'हामिल मूत'अह्हारह

लम तुनज'जिस्कल जाहिली'यतु बी-अन्जासिहा

लम तुल्बिस्कल मुद्लाहीम'मातु मिन सियाबिहा

अश-हदू अन'नका मिन दा-आ'इमिद दीनी

अर्कानिल मुसलिमीना

मा'-किलिल मू-मिनी

अश-हदू अन्नाकल इमामुल बर्रुत तकि'उर रज़ी'उज़ ज़की'उल हादी अल महदी

अश-हदू अन्नल आ-इम्मता मिन वुल्दिका कलिमतुत तक्वा

'लामुल हुदा वल उर्वातुल वुसक़ा वल हुज्जतु अला अह'लीद दुन्या

अश-हदू अन्नी बिकुम मू-मिनुं

बी याबिकुम मू-किनुन

बी-शरा'-ई'दीनी खावातीमी 'मली

क़ल्बी ले-क़ल्बी कुम सिल्मुन

अमरी ली-अम्रिकुम मुत्ताबी-उन

नुस'रती लकुम मु-अ''दत्तुन हत्ता याज़'नाल्लाहू लकुम

फ़-मा-आ'कुम ला मा-आ'दुव्विकुम सलावातुल'लाही अलैकुम

'ला अर्वाह'इकुम अज्सादी'कुम

शाहिदिकुम

ग़ा-इबिकुम

ज़ाहिरीकुम

बातिनिकुम

आमीन रब्बल आलमीन

 

بسم اللہ الرحمن الرحیم

बिस्मिल्ला हिर रहमा नीर रहीम

सलाम हो खुदा के दोस्त और इस के प्यारे पर सलाम हो, ख़ुदा के सच्चे दोस्त और इसके चुने हुए पर सलाम हो, ख़ुदा के पसंदीदः और इस के पसंदीदः फरजंद पर सलाम हो, हुसैन पर जो सितम दीदा शहीद हैं, सलाम हो हुसैन पर जो मुश्किलों में पड़े, और ईन की शहादत पर आंसू बहे! ऐ माबूद! मैं गवाह हूँ के वो तेरे दोस्त और तेरे दोस्त के फ़र्ज़न्द, तेरे पसंदीदः और तेरे पसंदीदः के फ़र्ज़न्द हैं, जिन्होंने तुझ से इज्ज़त पायी, तुने इन्हें शहादत की इज्ज़त दी, ईन को खुश्बख्ती नसीब की, और इन्हें पाक घराने में पैदाइश की खूबी दी, तुने क़रार दिया इन्हीं सरदारों में सरदार, पेशवाओं में पेशवा, मुजाहिदों में मुजाहिद और इन्हें नबियों के विरसे इनायत किये, तुने क़रार दिया इनको औसिया में से अपनी मख्लूकात पर हुज्जत, पस इन्होंने तबलीग़ का हक़ अदा किया, बेहतरीन खैरख्वाही की, और तेरी ख़ातिर अपनी जाँ कुर्बान की ताकि तेरे बन्दों को निजात दिलाएं नादानी और गुमराही की परेशानियों से जबकि इनपर चढ़ आये वो जो दुन्या पर रीझ गए, इन्होंने अपनी जानें मामूली चीज़ों के लिए बेच दीं और अपनी अआखेरत के लिए घाटे का सौदा ख़रीदा, इन्होंने सरकशी और लालच के पीछे चल पड़े, इन्होंने तुझे गज़बनाक और तेरे नबी को नाराज़ किया, इन्होंने तेरे बन्दे में से ईन की मानी जो ज़िददी और बेईमान थे के अपने गुनाहों का बोझ लेकर जहन्नम की तरफ चले गए, पस हुसैन (अ:स) ईन से तेरे लिए लड़े जमकर होशमंदी के साथ यहाँ तक की तेरी फरमाबरदारी करने पर इनका खून बहाया गया और इनके अहले हरम को लूटा गया! ऐ माबूद! लानत कर ईन जालिमों पर सख्ती के साथ और अज़ाब दे इनको दर्दनाक अज़ाब! सलाम हो आप पर ऐ रसूले खुदा के फ़र्ज़न्द, सलाम हो आप पर ऐ सरदारे औसिया के फ़र्ज़न्द, मैं गवाह हूँ के आप खुदा के अमीन और इसके अमीन के फ़र्ज़न्द हैं, और आप नेक्बखती में ज़िंदा रहे. काबिले तारीफ हाल में गुज़रे और वफात पाई वतन से दूर के आप सितम रसीदः शहीद हैं! मैं गवाह हूँ के खुदा आप को जज़ा देगा जिस का इस ने वादा किया, तबाह होगा वो जिस ने आप का साथ छोड़ा और अज़ाब होगा इसे जिसने आप को क़त्ल किया! मैं गवाह देता हूँ के आप ने खुदा की दी हुई ज़िम्मेदारी निभायी, आप ने इस की राह में जिहाद किया, हत्ता के आप शहीद हो गए, पस खुदा लानत करे जिस ने आप को क़त्ल किया, खुदा लानत करे जिस ने आप पर ज़ुल्म किया, और ख़ुदा लानत करे इस कौम पर जिस ने यह वाकये शहादत सुना तो इस पर खुशी ज़ाहिर की! ऐ माबूद मैं तुझे गवाह बनाता हूँ के इनके दोस्त का दोस्त और इनके दुश्मन का दुश्मन हूँ, मेरे माँ बाप कुर्बान आप पर ऐ फ़रज़न्दे रसूल,! ख़ुदा! मैं गवाह हूँ की आप रहे नूर की शक्ल में इज्ज़तदार पुश्तों और पाकतर रहमों में की  जाहिलियत की निजासतों ने आपको  आलूदह किया और वही इसने अपने बेहंगम लिबास आप को पहनाये हैं! मैं गवाह देता हूँ के आप पायाहाये दीन में से हैं, मुसलमानों के सरदारों में हैं, और मोमिनों की पनाहगाह हैं, मैं गवाह हूँ के आप इमाम हैं, नेक, पाक, पसंदीदः पाक रहबर, राह-याफ्ता और मैं गवाह हूँ की जो इमाम आप की औलाद में से हुए हैं वोह परहेज़गारी के तर्जुमान हिदायत के निशान मुहकमतर सिलसिला और दुन्या वालों पर ख़ुदा की दलील वा हुज्जत हैं! मैं गवाह हूँ की आप का और आप के बुजुर्गों का मानने वला   अपने दीनी अहकाम और अमल की जज़ा पर यक़ीन रखने वाला हूँ, मेरा दिल आप के दिल के साथ पैवस्त है, मेरा मामला आप के मामले के ताबे, और मेरी मदद आप के लिए हाज़िर है, हत्ता की खुदा आप को इज़्न-क़याम दे, पस आप के साथ हूँ, आप के साथ,  न की आप के दुश्मन के साथ, ख़ुदा की रहमतें हों आप पर और आपकी पाक रूहों पर आप के जिस्मों पर आप के हाज़िर पर, आप के ग़येब पर आप के ज़ाहिर और आप के बातिन पर ऐसा ही हो जहानों के परवरदिगार!!

अल्लाहुम्मा सल्ले अला मुहम्मद वा आले मुहम्मद

 

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