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हिंदी अनुवाद
ऐ
माबूद ! तेरी हम्द के ज़रिये तेरी तारीफ की शुरुआत करता हूँ और तो अपने
एहसान से राहे रास्त दिखाने वाला है और मुझे यक़ीन है की तो माफ़ी देने,
मेहरबानी करने के मक़ाम पर सब से बढ़ कर रहम-व-करम करने वाला है और शिकंजा
और अज़ाब के मौक़े पर सब से सख्त अज़ाब देने वाला है,
और
बड़ाई और बुज़ुर्गी के मक़ाम पर तू तमाम क़ाहिरों और जाबिरों से बढ़ा हुआ
है! ऐ अल्लाह ! तू ने मुझे इजाज़त दे रखी है की तुझ से दुआ व सवाल करूँ,
बस ऐ
सुनने वाले अपनी यह तारीफ सुन और ऐ मेहरबान मेरी दुआ कबूल फरमा. ऐ बख्शने
वाले मेरी खता माफ़ कर,
बस ऐ
मेरे माबूद ! कितनी हे मुसीबतों को तुने दूर किया और कितने अंदेशों को हटाया
और ख़ताओं से दर गुज़र की रहमत को आम किया और बलाओं के घेरे को तोड़ा और
रिहाई दी,
हमद
इस अल्लाह के लिए है जिस ने न किसी को अपनी ज़ौजा (पत्नी) बनाया और न किसी
को अपना बेटा बनाया न ही सल्तनत में इस का कोई शरीक है और न वो आजिज़ है के
कोई इस का सरपरस्त हो,
इस की
बड़ाई ब्यान करो! बहुत बड़ाई हम्द अल्लाह के लिए है इस की तमाम खूबियों और
इस की सारी नेमतों के साथ हम्द इस अल्लाह के लिए है और इस की तमाम खूबियों
और इस की सारी नेमतों के साथ हम्द इस अल्लाह के लिए है जिस की हुकूमत में
इस का कोई मुखालिफ नहीं न इस के हुक्म में कोई रुकावट डालने वाला है
,
हम्द
इस अल्लाह के लिए है जिस की आफ्रीनश में कोई इस का शरीक नहीं और इस का
बड़ाई में कोई इस जैसा नहीं! हमद इस अल्लाह के लिए है के जिस का हुक्म और
हम्द खलक में आशकार है इस की शान इस की बख्शीश के साथ ज़ाहिर है,
बिन
मांगे देने में इस का हाथ खुला हुआ है वही है जिस के खज़ाने कभी कम नहीं
होते और कसरत के साथ अता करने से इस की बख्शीश और सखावत में इजाफा होता है
क्योंकि वो ज़बरदस्त अता करने वाला है. ऐ माबूद! मै सवाल करता हूँ तुझ से
बहुत में से थोड़े का जबकि मुझे इस की बहुत ज़्यादा हाजत है और तो हमेशा इस
से बेनेयाज़ है वो नेमत मेरे लिए बहुत बड़ी और तेरे लिए इस का देना आसान है,
ऐ
माबूद ! बेशक तेरा मेरे गुनाह को माफ़ करना मेरी खता से तेरी दर गुज़र मेरे
सितम से तेरी चश्म-पोशी मेरे बुरे अमल की परदापोशी मेरे बहुत से जुर्मों पर
तेरी बुर्दबारी है जबकि इन में से कुछ मै ने भूल कर और कुछ जान बूझ कर किये
हैं तब भी इस से मुझे तमा हुई की मै तुझ से वो मांगूं जिस का मै हक़दार नहीं,
चुनांचेह तुने अपनी रहमत से मुझे रोज़ी दी और अपनी कुदरत के करिश्मे दिखाए,
क़बूलियत की पहचान कराई,
बस अब
मै तुझे बस अब मै बा अमन होकर तुझे पुकारता हूँ और सवाल करता हूँ,
उल्फत
से न डरे और घबराए और मुझे नाज़ है के इस बारे में तेरी बारगाह में आया
हूँ बस अगर तू ने क़बूलियत में देर की तो मै बे वजहे नादानी तुझ से शिक्वह
करूँगा अगरचे वो ताखीर कामो के नताएज से मुताअल्लिक तेरे इल्म में मेरे लिए
बेहतरी की हामिल हो बस मै ने तेरे सिवा कोई मौला नहीं देखा जो मेरे जैसे
पस्त बन्दे पर मेहरबान और साबिर हो,
ऐ
परवरदिगार ! तू मुझे पुकारता है तो मै तुझ से मुंह मोड़ता हूँ,
तू
मुझ से मोहब्बत करता है तो मै तुझ से खफगी करता हूँ,
तू
मेरे साथ उल्फत करता है तो मै बेरूखी करता हूँ,
जैसे
के मेरा तुझ से कोई एहसान रहा हो,
तो भी
मेरा यह तर्ज़े अमल तुझे मुझ पर रहमत फरमाने और मुझ पर अपनी
अता और बख्शीश के साथ फ़ज़ल व एहसान से सखावत फर्मा है,
बेशक
तू बहुत देने वाला सख़ी है,
हम्द
है इस अल्लाह के लिए जो सल्तानानत का मालिक,
किश्ती
को रवां करने वाला,
हवाओं
को काबू रखने वाला,
सुब्ह
को रोशन करने वाला और कयामत में जज़ा देने वाला जहानों का परवरदिगार है,
हम्द
है अल्लाह की के जानते हुए भी बुर्दबारी से काम लेता है,
और
हम्द है इस अल्लाह की जो कुव्वत के बा-वजूद माफ़ करता है,
और
हम्द है इस अल्लाह की जो हालते गज़ब में भी बड़ा बुर्दबार है,
और वो
जो चाहे इसे कर गुज़रने की ताक़त रखता है,
हम्द
है इस अल्लाह की जो मखलूक को पैदा करने वाला रोज़ी कुशादा करने वाला सुबह
को रौशनी बख्शने वाला सा'हबे
जलालत-व-करम और फ़ज़ल-व-नेमत का मालिक है जो ऐसा दूर है के नज़र नहीं आता
और इतना क़रीब है के सरगोशी को भी जानता है,
वो
मुबारक और बरतर है,
हम्द
है इस अल्लाह की जिस का हंसर नहीं,
जो जो
इस से झगड़ा करे,
न कोई
इस जैसा है के इस का कोई हमशक्ल हो,
न कोई
इस का मददगार-व-हम्कार है,
वो
अपनी इज्ज़त में सब इज्ज़त वालों पर ग़ालिब है,
और सभी
अज़मत वाले इस की अज़मत के आगे झुकते है,
वो जो
चाहे इस पर कादिर है,
हम्द
है अल्लाह की जिसे पुकारता हूँ तो वो जवाब देता है और मेरी बुराई की
परदापोशी करता है,
मै इस
की नाफ़रमानी करता हूँ तो भी मुझे बदी बदी नेमतें देता है के जिन का बदला
मै इसे नहीं देता,
बस इस
ने मुझ पर कितनी ही खुशगवार इनायतें और बख्शिशें की है,
कितनी
ही खतरनाक आफतों से मुझे बचा लिया है,
कई
हैरत अंगेज़ खोशियाँ मुझे दिखाईं हैं,
ब इन
पर इस की हम्द ओ सीना करता हूँ,
और
लगातार इस का नाम लेता हूँ,
हम्द
है अल्लाह की के जिसका पर्दा हटाया नहीं जा सकता और इस के रहमत का दर कभी
बंद नहीं होता इस का सायेल खाली नहीं जाता और इस का उम्मेदवार मायूस नहीं
होता,
हम्द
है अल्लाह की जो डरने वालों को पनाह देता है,
नेकोकारों को निजात देता है,
लोगों
के दबाये हुए को उभारता है,
बदा
बन्ने वालों को नीचा दिखाता है,
बादशाहों को तबाह करता और इन की जगह दूसरों को ले आता है,
हमद
है अल्लाह की के,
वोह
धौंसियों का ज़ोर तोड़ने वाला,
जालिमों
को बर्बाद करने वाला,
फरयादियों को पहुँचने वाला और बेइन्साफों को सज़ा देने वाला है,
वो
दाद्खाहों का दादरस हाजात तलब करने वालों का ठिकाना और मोमिनों की टेक है,
हम्द
है इस अल्लाह की जिस के खौफ से आसमान और आसमान वाले लरज़ते हैं,
ज़मीन
और इसके आबकार दहल जाते हैं,
समुन्द्र लरज़ते हैं,
और
वोह जो उनके पाँव में तैरते हैं,
हम्द
है अल्लाह की जिस ने हमें यह हिदायत की राहे
रास्त दिखाई है,
और हम
हरगिज़ हिदायत ना पा सकते अगर अल्लाह त'आल़ा
हमें हिदायत ना फरमाता,
हम्द
है इस अल्लाह की जो खलक करता है और वोह मखलूक नहीं,
वो
रिज्क़ देता है मर्ज़ूक नहीं,
वोह
खाना खिलाता
है और खाता
नहीं,
वोह
जिन्दों को मारता है और मरे हुओं को ज़िंदा करता है,
वोह
ऐसा ज़िंदा हैजिसे मौत नहीं,
भलाई
इसी के हाथ में है और वोह हर चीज़ पर कुदरत रखता है,
ऐ
माबूद ! अपनी रहमत हज़रत मुहम्मद (स:अ) पर नाज़िल फर्मा जो तेरे बन्दे,
तेरे
रसूल,
तेरे
अमानतदार,
तेरे
बर्गाजीदाह,
तेरे
हबीब,
तेरे
मखलूक में से सब से पसंदीदा हैं,
तेरे
राज़ के पासदार हैं और तेरे पैगामों को पहुंचाने वाले हैं,
इन पर
रहमत कर,
बेहतरीन,
नेकोतरीन ज़ेबातारीन,
कामिल्तारीन,
रू-इदा
तरीन,
पाकीज़ा
तरीन,
शफाफ
तरीन,
रौशन
तरीन,
और तू
ने जो बहुत रहमत की बरकत दी,
नवाजिश की,
मेहरबानी की,
और
दरूद भेजा अपने बन्दों में,
अपने
नबियों अपने रसूलों,
और
अपने बुजुर्गो में से किसी एक पर और जो तेरे यहाँ बुज़ुर्गी वाले हैं तेरी
मखलूक में से! ऐ माबूद! अमीरुल मोमिनीन अली (अ:स) पर रहमत फर्मा जो जहानों
के परवरदिगार के रसूल के वासी हैं तेरे बन्दे तेरे वली तेरे रसूल के भाई
तेरे मखलूक पर तेरी हुज्जत तेरी बहुत बड़ी निशानी और बहुत बिनाय अज़ीम है और
सिददिका ताहिरा फातिमा (सलामुल लाहो अलैहा) पर रहम फर्मा जो तमाम जहानों
की औरतों की सरदार हैं और नबी-ए-रहमत के दो नवासों और हिदायत वाले दो अ'इम्माह
हसन (अ:स) और हुसैन (अ:स) पर रहमत फर्मा जो जन्नत के जवानों के सय्यद व
सरदार हैं और मुसलमानों के अ'इम्माह
(अ:स) पर रहमत फर्मा के वो अली जैन अल-आबेदीन(अ:स),
मोहम्मद अल-बाक़र (अ:स),
जाफर
अल-सादिक़ (अ:स),
मूसा
अल-काज़िम (अ:स),
अली
अल-रज़ा (अ:स),
मुहम्मद तक़ी अल-जवाद (अ:स),
अली
नक़ी (अ:स),
अल-हादी (अ:स),
हसन
अल-अस्करी (अ:स),
और
बेहतरीन सपूत हादी अल-महदी (अ:स)
हैं जो तेरे बन्दों पर तेरी हुज्जतें और तेरे शहरों में तेरे अमीन हैं,
इन पर
रहमत फर्मा बहुत बहुत,
हमेशा
हमेशा ! ऐ माबूद! अपने वली-ए-अम्र पर रहमत फर्मा के जो क़ाएम,
उम्मिदगाहे-दिल,
और
मोंतज़र है इसके गिर्द अपने मक्रिब फरिश्तों का घेरा लगा दे और
रूह-अल-क़ुद्स के ज़रिये इसकी ताईद फर्मा,
ऐ
जहानों के परवरदिगार,
ऐ
माबूद ! इसे अपनी किताब की तरफ दावत देने वाला और अपने दीन के लिए क़ाएम
करार दे,
इसे
ज़मीन में अपना ख़लीफा बना जैसे इनको ख़लीफा बनाया जो इस से पहले हो गुजरें
हैं,
अपने
पसंदीदा दीन को इस के लिए पायेदार बना दे इसके खौफ के बाद इसे अमन दे की वो
तेरा इबादत गुज़ार है,
किसी
को तेरा शरीक नहीं बनाया,
ऐ
माबूद! इसे मोअज़-जीज़ फर्मा और इसके ज़रिये मुझे इज्ज़त दे मै इस की मदद करूँ
और इसेक ज़रिये मेरी मदद फर्मा इसे ब-इज्ज़त मदद दे और इसे आसानी के साथ
फ़तह दे,
और इसे
अपनी तरफ से कुव्वत
वाला मददगार अता फर्मा,ऐ
माबूद!इस के ज़रिये अपने दीं और अपने नबी की सुन्नत को ज़ाहिर फर्मा,
यहाँ
तक के हक़ में से कोई चीज़ मखलूक के खौफ से
मख्फी व पोशीदा न रह जाए,
ऐ
माबूद! हम ऐसी बरकत वाली हुकूमत की ख़ातिर तेरी तरफ रगबत रखते हैं जिस से तू
इस्लाम और अहले-इस्लाम को क़ुव्वत दे और नेफ़ाक़ और अहले नेफ़ाक़ को ज़लील करे
और इस की हुकूमत में हमें अपनी इता-अत के तरफ बुलाने वाले और अपने रास्ते
के तरफ रहनुमाई करने वाले करार दे और इस के ज़रिये हमें दुनिया और आखिरत की
इज्ज़त दे,
ऐ
माबूद! जिस हक़ की तू ने हमें मारेफ़त कराई इस के तहम्मुल की तौफीक दे और
जिस से हम क़ासिर रहे इस तक पहुंचा दे,
अ
माबूद! इस के ज़रिये हम बिखरों को जमा कर दे,
इस के
ज़रिये हमारे झगड़े ख़तम कर और हमारी परेशानी दूर फर्मा,
इसके
ज़रिये हमारी क़िल्लत को कसरत और ज़िल्लत को इज्ज़त में बदल दे,
इसके
ज़रिये हमें नादार से तवंगर बना और हमारे क़र्ज़ अदा कर दे, इसके
ज़रिये हमारा फ़क्र दूर फर्मा दे,
हमारी
हाजतें पूरी कर दे,
और
टंगी को आसानी में बदल दे, इसके
ज़रिये हमारे चेहरे रौशन कर और हमारे कैदियों को रिहाई दे, इसके
ज़रिये हमारी
हाजात बर ला और हमारे वादे निभा दे
,
इसके
ज़रिये हमारी दुआएं कबूल फर्मा और हमारे सवाल पूरे कर दे,
इस के
ज़रिये दिनिया व आखिरत में हमारी उम्मीदें पूरी फर्मा और हमें हमारी दरखास्त
से ज़्यादा अता कर,
हमारे
ऐ सवाल किये जाने वालों में सब से बेहतरीन और ऐ सब से ज़्यादा अता करने वाले,
इस के
ज़रिये हमारे सीनों को शिफा दे और हमारे दिलों से बुग्ज़ व कीना मिटा दे जिस
हक़ में हमारा इख्तालाफ है,
अपने
हुक्म से इस के ज़रिये हमें हिदायत फर्मा,
बेशक
तू जिसे चाहता है सीधे रास्ते की तरफ ले
जाता है,
इस के
ज़रिये अपने और हमारे दुश्मन पर हमें गलबा अता फर्मा,
ऐ
सच्चे खुदा ऐसा ही हो,
ऐ
माबूद ! हम शिकायत करते हैं तुझ से अपने नबी के उठ जाने की,
के उन
पर और उन की आल (अ:स) पर तेरी रहमत हो और अपने वली की पोशीदगी की और शाकी
है दुश्मनों की कसरत और अपनी क़िल्लत तादाद और फ़ितनों की सख्ती और
हवादिस-ए-ज़माना की यलगार की शिकायत करते हैं,
बस
मुहम्मद और इन की आल पर रहमत फर्मा इन पर फ़तह के साथ और इस में जल्दी करके
तकलीफ दूर करदे,
नुसरत
से इज्ज़त अता कर,
हक़
के गलबे का इज़हार फर्मा,
ऐसी
रहमत फर्मा जो हम पर साया करे और अमन अता कर जो हमें महफूज़ बना दे,
रहम
फर्मा ऐ सब से ज़्यादा रहम करने वाले |