दुआए अस-सीमात

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दुआ अस-सीमात अंग्रेजी में       दुआ अस-सीमात उर्दू में 

शेख तुसीसैयद इब्न तावूस और कफामी के अनुसार,  मोहम्मद इब्न उस्मान उमरी (जो इमाम ज़माना के विश्वसनीय और प्रतिनिधि है) कहते हैं की यह दुआ  इमाम मुहम्मद बिन अली अल बाकिर (अ:स)और इमाम जाफर बिन मोहम्मद अल सादिक (अ:स)  के स्वरा बताई गयी है! अल्लामा मजलिसी के अनुसार सभी पवित्र धार्मिक विद्वान् इस दुआ को पढ़ते थे! शेख कफामी के अनुसार इस दुआ में "इस्मे आज़म" (अल्लाह के महान नाम) शामिल है!  इमाम मोहम्मद अल बाक़िर (अ:स) ने अपने वफादारों को इस दुआ के पढ़ने की सलाह इसलिए दिया था के इसके पढ़ने से अह्लाबैत (अ:स) के दुश्मनों का पतन होता है! इमाम जाफर बिन मोहम्मद अल सादिक (अ:स) ने बताया की अल्लाह (अजल्लाल लाहो ता-आला फर्जुहू) ने अपने नबी मूसा (अ:स) को अपने दुश्मनों पे काबू पाने के लिए यह दुआ सिखाई थी! इस दुआ को विशेषकर शुक्रवार सूर्यास्त के ठीक पहले पढ़ने की ज़्यादा अहमियत है!

     

बीस-मिल-लाहिर-रहमानिर-रहीम

अल्लाहुम्मा इन-नी अस अलुका   बीस-मिकल-अजइमिल-आ-ज़अमिल-आज़-जिल अल लील 

अक-रमी अल-लज़ इज़आ दुएएता बिही ला मगालिकी अब-वाबिस-समा-लिलिल-फत-ह बीररह’ मतीन फतहअत

 इज़आ दुएएता बिही ला मजआया-इकी अब- वाबिल-अर्ज़इ लील-फराजिन-फराजत

 इज़आ दुएएता बिही लाल -स-री लील-युस-री त्यास-सरत

 इज़आ दुएएता बिही लाल -अम-वाती  लीं नुशूरिन-तशारत

व इज़आ दुएएता बिही अला कश –फिल-बा-सा-इ वाज़”-ज़अर-रा-इन-कशाफत

व बिजलाली वज-हिकल-करीम

अक-राम-वूजोधी  ज़-जिल-वुजूह

अल-लज़ई अनत लाहुल-वुजूह

व खज़आत लहर-रिकाब

व खाशा लाहुल-अस’-वात

व वाजिलत लाहुल-कुलूबू मीम-मखाफतिक

व बी-कुद-वातिकल-लती बिहा 

तुम-सिकुस-समा-अ अन तक़ा’ लाल-अर्ज़  इल-ला बिदनिक

व तुम-सिकुस-समाती वल-अर-ज़अ अन ताज़ूला

व बी-मशेई-अतिकाल-लती जाल-लहाल-अअलामून

व बी-कलिमतिकल-लती  खलक-ता बिहास-समावाती वल-अर्ज़

व बी-कलिमतिकल-लती आना’-ता बिहाल-अजा-इब

 खलक-ता बिहाज़’ ज़उल-माता व जाल-तहा लैलन

व जाल-ताल-लायला सकना

 खलक-ता बिहान-नूर व जाल-तहु नाहरा

व जाल तन -नहार नुशूराम-मुब-सइरा 

व खलक-ता बिहाल क़मरा व जाल-ताल-क़मरा नूरा

 खलक-ता बिहाल क़मरा व  जाल-तश-शाम-सा ज़इ-या-अ

व खलक-ता बिहाल-क़मरा व जाल-ताल-क़मरा नूरा

 खलक-ता बिहाल-कवाकिबा व जाल तहा नुजूमाव-व बुरुजाव-व मासआबीहअ व जीनातौ-व रुजूमा

व जाल-ता लहा मशारिक़ा का मगारिब

व जाल-ता लहा मतआलिया व मजारी 

व जाल-ता लहा फलकाव-व मसाबिः

व क़द-दर-तहा फ़ीस-समा-इ मनाज़िला फाहसंता तक-दी-रहा

व सअव-वर-तहा फअह’-सन्ता तस’-वी-रहा

व अह’ अय्ताहा बी-अस-मा-इक इहआआ-आ

व दब-बर-तहा बी हइक-मतिका तद-बीराव-व अह’-सन-ता तद-बीरहा

व साख-हर-तहा बी-सुल-तआनिल-लेली व सुल-तान-नहारी वस-साअति  दादीस सिनीना वल-हसाब

व जाल-ता रु-य़ाटाःआऴीज्ञ्ऩीन-नासी मर-आव-वाहइजा

व-अस-अलुकल्लाहुम्मा बिमाज-दिका

अल-लज़ कल-लम-ता बिही अअब-दका  रसूलाका मूसब-न मराना अलैहिस सलामु फिल-मुव द-दसीन

फौक़ा इह-सासिल करूबी-ईन

फौक़ा गामा-इमिन-नूर

फौक़ा ताबूतिश-शहादाह

फी मूदीन-नारी  फी तउरी सेना-अ

 फी जबाली ऊरीथा फिल- अदील-मुक़द-दासी फिल-बुक-अतिल- मुबाराकती मिन जानिबित’-तूरिल-ईमानी मिनाश-शाजारह

  फी अर्ज़इ मिसरा बी-तिस-इआआआ-यातिम बी-यिनात

 यू-मा फरक-ता लिबनी इस-रा-ईलाल-बह 

व फिल-मुम-बजिसातिल-लती आना’-ता बिहाल- अजा-इबा फी बह’-री सूफ

व अक़द-ता मा-अल-बहरी फी क़ल-बिल-ग़म-री कल-हइजारती

व जावाज्ता बी-बनी इस-रा-ईलाल-बहरा व तम्मत कलिमतुकल- हुस-ना लाय्हीम बीमा

आबरू व अव-रथ-ताहम-मशारिकाल-अर-ज़  मागा रिबहाल-लती बारक-ता फीहा लील-अअलामीन

व अग़-रक-ता फ़िर-अवना व जुनूदहू व मराकिबहू फिल-यौम

व बीस-मिकल-अजीमिल-आज़अमिल-आजिल-अजल-लील-अक-रम

व बिमाज-दिकल-लज़ई तजल-लैता बिही

ली-मूसा कलेमिका अलैहिस-सलामु फी तूरी से-ना-अ

व ली-इब्राहीम अलैहिस-सलामु खालीका मिन कब-लू फी मस-जिदिल-खीफ

व ली-इस्हाका अफ़ी-यिका अलैहिस-सलामु फी  बी-री शीई

व ली-याकूबा नबी-यिका अलैहिस-सलामु फी  बयती ईल

व औ-फैता ली-इब्राहीमा अलैहिस-सलामु बी-मीसाकिक

व ली इस्हाका - बिहइल-फिक

व ली-याकूबा बिशाहदातिक

व लील -मु-मिनीना बीवा’-दिका

  लीद-दएऐना बी-अस-मा-इक फजाब-त

  बी-मज-दिकल-लज़ ज़अहारा ली-मूसा इब्नी म-राना लाय्हिस-सलामु ला कूब-बतिर-रुम्मान

  बिआया-यातिकल-लती  काट ला अर-ज़इ मिस-रा

बी-मज-दी  ल-इज़-जाती  ल-गलाबती

बिआया-यातिन जीजाह

  बी-सुल-तआनिल-कू-व 

  बी-इज़-जातील-कुद-रह

  बी-श-नील-कलिमतित-ता-ममः

  बी-कल्मातिकल-लती ताफाज़”-ज़अल-ता बिहा ला अह्लिस-समा  अति  ल-अर-ज़   अह्लिद-दूँ-या   अह-लील-आ-खिरह

  बी-रह’-मतिकल-लती मनन-ता बिहा अला जमीई खल-किक

  बीस –तितआआआटिकल-लती अकाम-ता बिहा अलाल-अअलामीन

  बी-नूरिकल-लज़ई क़द खर-रा मिन फज़ीही थूरू सेना-अ

  बी-इल-मिका   जलालिका   किब-री- या-इक   ज़-जातिक

  जबरूतिकल-लती लम  तस-तकिल-लाहाल-अरज

 न-खाफाज़अत लहास-समा  अत

 न्ज़जारा लहाल-उम-कुल-अक-बर

  रकदत लहाल-बिहआरू  ल-अन-हार

  खज़आत लहाल-जिबा;

  सकनात लहाल-अर-ज़उ बी-मनाकिबिहा

 स-तस-लमत लहाल-खाला-इकु कुल-लूहा

  खाफकात लहार-रियाहउ फी जरयानिहा

  खामादत लहान-नीरानु फी औ-तानिहा

वू बिसुल-तआनिकल-लज़ई उरिफत लाका बिहाल-गलाबतु ज़ह-रद-दुहूरी   उमीद-ता बिही फ़ीस समा  अति  ल-अरजइन

  बिकलिमतिका कलिमतिसईद-कील-लती सबक़त ली-अबीना आआआ-दम अलाय्हिस-सलामु    उर-री यातिहू बीर-रह’-मह   अस-अलुका बी-कलिमतिकल-लती गलबत कुल-ला शै 

  बी-नूरी  ज-हिकल-लज़ई तजल-लेता बिही लील-जबाली फजा तहु दक-काऊ - खर-रा मूसा सका

  बिमाज-जिकल-लज़ई ज़हरा अला तूरी से-ना-अ फाकल-लम-ता बिही अअब-दका   रसूलाका मूसाबिना म-रान

  बीतअल-अतिका फी साएएर

  ज़उहूरिका फी जबाली फाराना बी-रबा  अतिल-मुक़द-दासीना   जुनूदिल-माला-इकतीस-सआआआ-फ-फीन

  खुसूई’L-माला-इकातिल-मुसाब-बिहइन

  बी-बरकातिकल-लती बारक-ता  फी उम्मती मुहअम्मदीन सअल-लाल्लाहू अइलाय्ही   आ-लिह

  बारक-ता ली-याकूबा इस-रा-ईलिका फी उम्मती मूसा अले-हिमास-सलाम  

  बारक-ता लिहअबीबिका मुहअम्मदीन सअल-लाल्लाहू अअलिही  आ-लिही फी इत-रतिही   उर-री-यथि  उम्मातिः

अल्ल्लाहुम्मा   कमा गिब-ना न ज़आलिका  लम नाश-हद-हु  आआआ-मन-ना बिही  लम नाराहू ईद-काऊ -  ज़-ला

अन तुसअल-लिया ला मुहअम्मैव -  अन तुबारिका ला मुहअम्मदीन-व  आ-ली मुहअम्मदीन काफ-ज़अली मा S’अल-लयता   बारक-ता  तरह’-अम-ता अला इब-राहीमा   आ-ली इबराहीम

इन-नका हअमीदुम-मजीद

फाआलुल-लीमा तुरीद

  अंत अला कुल-ली शै-इन क़दीरून 

अब अल्लाह से अपनी दुआ मांगिये और नीचे लिखी हुई दुआ पढ़ें 
अल्लाहुमा बिहअक-की हदआद-दुआआआआ-इ

  बिहअक-की हदइहील-अस-मा-इल-लती  ला या’-लामू तफ-सीरहा -ला ता-वीलाहा  -ला या’-लामू बातइन्हा  -ला ज़आहिरहा गैरुक

अल-ली अला मुहअम्मद  आ-ली मुहअम्मद

  अन तर्ज़ुक़नी  खाय्रद-दून-या  ल-आ-खिरह

 फ-अल बी मा अंत अह-लुह

 -ला तफ-अल बी आना अह-लुहू

 न-ताकिम ली मिन

 ग-फ़िर ली मिन ज़उनूबी मा तकाद-दम मिन्हा   मा ताख-हरा   ली-व अलिदय-या    ली-जमीईल-मु-मिनीना  ल-मु-मिनात

   स-सिया ले-या मिन हअलाली रिज्किक

   स-सिया अले-या मिन हअलाली रिज्किक

 क-फ़िनी मूनाता इन-सानी सौ-इव-व सुल-तानी सौ -इव-व  क़रीनी सव-इव-व यव-मी सव-इव-व  साती सौ-इन

 न-ताकिम ली मिम्मय-यकीदुनी   मिम्मय-यब-घी ले या   युरीद बी   बी-अह-ली   औ-लाज़ी   ईख-व अनी   जीरानी   क़राबाती मिनल-मु-मिनीना  ल-मु-मिनाति ज़उल-मा 

इन-नका ला मा तशा-उ क़दीर

  बिकुल-ली शय-इन लीम

आ-मीन रब- बल-अअलामीन

अल्लाहुमा बिहअक-की हदआद-दुआआआआ-इ तफज़”-ज़ अल

ला फुक़रा-इल-मुमिनीना  ल-मुय्मिनाती बिल-गिना  थ-थर-व 

  ला मर-ज़आल –मु-मिनाति बिष-शिफा-इ  सिहअह

  ला अहया-इल-मुमिनीना  ल-करामः

  ला अम-व अतिल-मु-मिनाति  बिल-मग़-फिरती  र-रह’-माह

  ला मुसाफिरील-मुमिनीना  ल-मु-मिनाति बीर-रज-ज़ि इला औ-तआनिहीम सालिमीना गानिमींन

बी-रह’-मतिका या अर-हअमर-राहइमें

  अल-लाल्लाहू ला से-यिदिना मुहअम्मदीन खातामिन-नबी-ईन  त-रतिहित-ताहिरीना  सल-लमा तस-लीमन कसीरा

अल्लाहूम्मा सल्ले अला मोहम्मदीन वा आले मोहम्मद

 
  بسم الله الرحمن الرحيم

 

 

हिन्दी अनुवाद

ऐ माबूद मै तेरे अज़ीम बड़ी अज़मत वाले, बड़ी रौशन बड़ी इज्ज़त वाले नाम के ज़रिये सवाल करता हूँ के जब आसमान के बंद दरवाज़े रहमत के लिए खोलने के लिए तुझे इस नाम से पुकारें तो वोह खुल जाते हैं, और जब ज़मी के तंग रास्ते खोलने के लिए तुझे इस नाम से पुकारा जाए तो वोह कुशादा हो जाते हैं और जब सख्ती के वक़्त आसानी के लिए इस नाम से पुकारें तो आसानी हो जाती है और जब मुर्दों को उठाने के लिए युझे इस नाम से पुकारें तो वोह उठ खड़े होते हैं और तंगियाँ और सख्तियाँ दूर करने के लिए तुझे इस नाम से पुकारें तो वोह दूर हो जाती हैं और सवाली हूँ तेरी ज़ात करीम के जलाल के ज़रिये जो सब से बुज़ुर्ग ज़ात है सब से मो-अज़ज़ ज़ात है के जिस के आगे चेहरे झुकते हैं इसके सामने गर्दनें ख़म होती हैं, इसके हुज़ूर आवाजें कांपती हैं और जिसके खौफ से दिलों में लरज़ा तारी हो जाता है और सवाल करता हूँ तेरी इस कुवत के ज़रिये जिस से तुने आसमान को ज़मीन पर गिरने से रोक रखा है मगर जब तू इसे हुकुम दे और इस आसमान और ज़मीन को रोका हुआ है के खिसक न जाए और तेरी इस मशियत के ज़रिये सवाली हूँ, आलामीन जिस के मती-अ हैं तेरे इन कलमात के वास्ते से सवाली हूँ  जिन से तुने अस्स्मानो और ज़मीन को पैदा किया तेरी इस हिकमत के वास्ते से जिस से तुने अजाएब को बनाया और जिस से तुने तारीकी को खलक किया और इसे रात करार दिया और इसे आराम के लिए ख़ास किया और अपनी हिकमत से तुने रोशनी पैदा की और इसे दिन का नाम दिया और दिन को जाग उठने और देखने के लिए बनाया और तुने इस से सूरज को पैदा किया और सूरज को रौशन किया, तुने इस से चाँद को पैदा किया और चाँद को चमकदार बनाया और तुने इस से सितारों को पैदा किया, इन्हें फरोजां किया, इन के बुर्ज बनाए और इन्हें चिराग बनाया और जीनत बनाया, संग्बार बनाया, तुने इन के  लिए मशरिक और मगरिब बनाए, तुने इन के चमकने और चलने  की राहें बनायीं, तुने इन के लिए फलक और सैर की जगह बनायी और आसमान में इन की मंजिलें मुक़र्रर कीं, पस तुने इन का बेहतरीन अंदाजा ठहराया और तुने इन्हें शकल अता किया, किया ही अच्छी शकल दी और इन्हें अपने नामों के साथ पूरी तरह शुमार किया और अपनी हिकमत से इनका एक निजाम क़ाएम किया, और खूब तदबीर फरमाई और रात के अरसे और दिन की मुद्द्त के लिए मती-अ बनाया और सा-अतों और सालों के हिसाब का ज़रिया बनाया और सब लोगों के लिए इन को देखना यकसां कर दिया, और सवाल करता हूँ तुझ से ऐ अल्लाह तेरी उस बुज्रुर्गी के ज़रिये जिस से तुने अपने बन्दे और रसूल हज़रत मूसा (अस) से कलाम फरमाया, पाक  लोगों में जो फरिश्तों की समझ से बाला है, बादलों से बुलंद ताबूत शहादत से ऊंचा, जो आग के सतून में तूर के सीना में कोहे हुरैस में, वादिये मुक़द्दस में, बरकत वाली ज़मी में, तूर-ए ऐमन की तरफ, एक दरख़्त से जो सर ज़मीन-ए-मिस्र में पैदा हुआ सवाल करता हूँ नौ रोशन मोएज्जों के वास्ते से सुर इस दिन के वास्ते से के जिस दिन तुने बनी इस्राइल के लिए दरया में रास्ता बनाया और इन चश्मों में जो पत्थर से जारी हुए के जिन के ज़रिये तुने अजीब मोएज्ज़ात को दरया-ए-सूफ में ज़ाहिर किया!और तुने दरया के पानी तो भंवर के दरम्यान पत्थरों की मानिंद जकड़ के रख़ दिया और तुने बनी इस्राइल को दरया से गुज़ार दिया और इन के बारे में तेरा बेहतरीन दावा पूरा हुआ जब इन्हों ने सब्र किया और तुने इनको ज़मीन के मश्रीको-मगरिब का मालिक बनाया जिन में तुने आलामीन के लिए बरकतें रखीं हैं और तुने फिरौन और इसके लश्कर को, इन की सवारियों को दरिया-ए-नील में गर्क कर दिया और सवाली हूँ ब-वास्ता तेरे नाम के जो बुलंद-तर इज्ज़त वाला रौशन बुज़ुर्गी वाला है, और ब-वास्ता तेरी शान के जो तुने अपने कलीम मूसा (अस) के लिए चाहे शीई में ज़ाहिर की और अपने महबूब याकूब (अस) के लिए बैत-ए-इल में ज़ाहिर की, और तुने इब्राहीम (अस) से अपने अहद व पैमान पूरा किया और इस्हाक़ (अस) के लिए अपनी क़सम पूरी की और याकूब (अस) के लिए अपनी शहादत ज़ाहिर की और मोमिनीन से अपने वादा वफ़ा किया और जिन्हों ने तेरे नामों के ज़रिये दुआएं कीं इन्हें कबूल किया और सवाली हूँ ब वास्ता तेरी शान के जो कूब-बाये रमान पर मूसा इब्न इमरान (अस) के लिए ज़ाहिर हुई और ब वास्ता तेरे मोएजज़ों के जो मुल्के मिस्र में तेरी शान और इज्ज़त और ग़लबा से इज्ज़त वाली निशानोयों से ग़ालिब कुवत से कुदरत कु बुलंदी और पूरा होने वाले कौल की शान से रोनूमा हुए और तेरे इन कलमात से जिन के ज़रिये तुने आसमान और ज़मीन के रहने वालों और अहले दुनिया और अहले आखेरत पर एहसान किया, और सवाली हूँ तेरी इस रहमत के ज़रिये जिस से तुने अपनी सारी मखलूक पर करम कियासवाली हूँ  तेरी इस तवानाई के वास्ते से जिस से तुने अहले आलम को क़ाएम रखासवाली हूँ ब वास्ता तेरे उस नूर के जिस के खौफ से तूरे सीना चकना चूर हुआसवाली हूँ तेरे इस आलम व जलालत और तेरी बड़ाई और इज्ज़त और तेरे जब्र्रोत के वास्ते से जिस को ज़मीन बर्दाश्त न कर सकी और आसमान आजिज़ हो गए और इस से ज़मीन की  गहराइयां कपकपा गयीं, जिस के आगे समंदर और नहरें रुक गयीं, पहाड़ इस के लिए झुक गए, और ज़मीन इसके लिए अपने सतूनों पर ठहर गयी, और इसके सामने सारी मखलूक सर-न्गुं  हो गयी, अपने रू-ओं पर चलती हवाएं इसके सामने परेशान हो गयीं, इस के लिए आग अपने मक़ाम पर बुझ गयीसवाली हूँ   ब वास्ता तेरी उस हुकूमत के जिस के ज़रिये  हमेशा हमेशा तेरे ग़लबे की पहचान होती है, और आसमानों और ज़मीनों में इस से तेरी हम्द होती हैसवाली हूँ   ब वास्ता तेरे इस सच्चे कौल के जो तुने हमारे बाप आदम (अस) और इनकी औलाद के लिए रहमत के साथ फरमाया हैसवाली हूँ   ब वास्ता तेरे इस कलमा के जो तमाम चीज़ों पर ग़ालिब हैसवाली हूँ   ब वास्ता तेरी ज़ात के इस नूर के जिस का जलवा तुने पहाड़ पर ज़ाहिर किया तो वो टुकड़े टुकड़े हो गया और मूसा (अस) बेहोश होकर गिर पड़ेसवाली हूँ   ब वास्ता तेरे इस बुज़ुर्गी के जो सीना-ए तूर पर ज़ाहिर हुई तो तुने अपने बन्दे और अपने रसूल मूसा (अस) बिन इमरान से हमकलाम हुआ सवाली हूँ तेरी नुरानियत के ज़रिये जनाब इसा (अस) की मुनाजात की जगह में और तेरे नूर के ज़हूर के ज़रिये कोहे फार इन में बुलंद व मुक़द्दस मक़ामात में सफें बांधे हुए मलाइका की फ़ौज के ज़रिये और तस्बीह ख्वान मलाइका के ख़ुशू-अ के ज़रिये सवाल करता हूँ ब वास्ता तेरी इन बरकात के ज़रिये जिन से तुने बरकत अता की अपने खलील इब्राहीन (अस) को हज़रत मुहम्मद (सअवव) की उम्मत में बरकत दी और अपने बर्गाजीदः इस्हाक़ (अस) को हज़रत ईसा (अस) की उम्मत में बरकत दी, और बरकत दी तुने अपने ख़ास बन्दे याकूब (अस) को हज़रत मूसा (अस) की उम्मत में और बरकत दी तुने अपने हबीब हज़रत मुहम्मद (सअवव) को इन की इतरत, ज़ुर्रियत, और इन की उम्मत में खुदाया जैसा के हम इन के अहद में मौजूद न थे और हमने इन्हें देखा नहीं और इन पर सच्चाई और हक्कानियत के साथ और दुरुस्ती से ईमान लाये, हम चाहते हैं की मुहम्मद और आले मुहम्मद पर रहमत फर्मा और मुहम्मद और आले मुहम्मद पर बरकत नाज़िल फर्मा और मुहम्मद और आले मुहम्मद पर शफ़क़त फर्मा जिस तरह तुने बेहतरीन रहमत और बरकत और शफ़क़त इब्राहीम और आले इब्राहीम पर फरमाई थी, बेशक तू हम्द और शान वाला है जो चाहे सो करने वाला है और तू हर चीज़ पर कुदरत रखता है

अब अपनी हाजत ब्यान कीजिये  और कहिये  :

ऐ माबूद! इस दुआ के वास्ते  से के जिन की तफसीर तेरे सिवा कोई नहीं जानता और जिन की हकीकत से सिवाए तेरे कोई आगाह नहीं तो मुहम्मद और आले मुहम्मद पर रहमत फर्मा और  मुझे से वोह सुलूक कर जो तेरे शायाने शान है, न की वो सुलूक जिसका मै मुस्तहक हूँ और मेरे गुनाहों में से जो मै ने पहले किये और जो बाद में, बख्श दे और अपना रिज्क़ हलाल मेरे लिए कुशादः कर दे और मुझे बुरे इंसान बुरे हमसाये बुरे साथी और बुरे हाकिम की अज़ीयत से बचाए रख़ बेशक तू जो चाहे वो करने पर कादिर है और हर चीज़ का इल्म रखता है, आमीन या रब्बुल आलामीन!

मो'अल्लिफ कहते हैं के बाज़ नुस्खों में यूं आया है : इस्ले बाद जो हाजत हो इसका ज़िक्र करें और कहें : और तू हर चीज़ पर कुदरत रखता है! ऐ अल्लाह, ऐ मुहब्बत करने वाले, ऐ एहसान करने वाले, ऐ आसमान और ज़मीन के इजाद करने वाले, ऐ जलालत और बुजर्गी वाले, ऐ सब से ज़्यादा रहम करने वाले, ऐ माबूद, इस दुआ के वास्ते से और इन नामों के वास्ते से की जिन की

और अल्लामा मजलिसी (अलैहिर रहमा) ने मिस्बाहे सय्यद बिन बाक़ी (अलैहिर रहमा) से नक़ल किया है की दुआ सीमात के बाद यह दुआ पढ़ें

तफसीर और तावील और जिन के बातिन व ज़ाहिर को सिवाए तेरे कोई नहीं जानता तो मुहम्मद व आले मुहम्मद पर रहमत फर्मा और मुझे दुनिया और आखेरत की भलाई अता फर्मा!

अब हाजत तलब करें और कहें :

और मुझ से वो सुलूक कर जो तेरे शायाने शान है न की वो सुलूक जिसका मै मुस्तहक हूँ और मेरी तरफ से फलां बिन फलां से बदला ले

फलां बिन बिन फलां की जगह अपने दुश्मन का नाम ले, और कहें :

और मेरे गुजीशता और आइन्दा तमाम गुनाहों को माफ़ फर्मा और मेरे मा बाप और सारे मोमिनीन और मोमिनात के गुनाह बख्श दे और अपना रिज्क़ हलाल मेरे लिए कुशादः कर दे और मुझ को बुरे इंसान बुरे हमसाये बुरे हाकिम बुरे साथी बुरे दिन बुरे वक़्त की अज़ीयत से बचाए रख़ और मेरी तरफ से बदला ले ले इस से जिस ने मुझे धोका दिया और जिस ने मुझ पर ज़ुल्म किया और जो ज़ुल्म का इरादा रखता है, मेरे अहल मेरे औलाद मेरे भाईओं और मेरे हमसायों के लिए जो मोमिनीन और मोमिनात में से हैं इस से इन्तेकाम ले, बे शक तू जो कुछ कुदरत रखता है और हर चीज़ से वाकिफ है, आमीन ऐ रब्बुल आलमीन, ऐ माबूद इस दुआ के वास्ते से ग़रीब मोमिनीन और मोमिनात को माल व मत्ता-अ अता फर्मा, बीमार मोमिनीन और मोमिनात को तंदुरुस्ती और सेहत अता फर्मा, और ज़िंदा मोमिनीन और मोमिनात पर लुत्फ़ व करम फर्मा और मुर्दा मोमिनीन और मोमिनात पर बख्शीश और रहमत फर्मा, और मुसाफिर मोमिनीन और मोमिनात को सलामती व रिज्क़ के साथ घरों में वापस ला, अपनी रहमत से ऐ सब से ज़्यादा रहम करने वाले और हमारे सरदार नबियों के खातिम हज़रत मुहम्मद पर रहमते खुदा हो और इन की पाकीजः औलाद पर और सलाम हो, बहुत ज़्यादा सलाम!

शेख इब्न फहद ने फरमाया है की मुस्तहब यह है की दुआए सीमात के बाद कहें :

ऐ माबूद मै सवाल करता हूँ ब-वास्ता इस दुआ की हुरमत के और इन नामों के ज़रिये जो इस में मजकूर नहीं और इस तफसीर व तदबीर के वास्ते से सवाल करता हूँ जिस का सिवाए तेरे कोई अहाता नहीं कर सकता की तू मेरे लिए ऐसा और ऐसा कर (ऐसा और ऐसा की जगह पर अपनी हाजत तलब करे)         

 

 
                  

            

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